84. अल-इन्शिकाक - क़ुरान
- 1. जबकि आकाश फट जाएगा,
- 2. और वह अपने रब की सुनेगा, और उसे यही चाहिए भी
- 3. जब धरती फैला दी जाएगी
- 4. और जो कुछ उसके भीतर है उसे बाहर डालकर खाली हो जाएगी
- 5. और वह अपने रब की सुनेगी, और उसे यही चाहिए भी
- 6. ऐ मनुष्य! तू मशक़्क़त करता हुआ अपने रब ही की ओर खिंचा चला जा रहा है और अन्ततः उससे मिलने वाला है
- 7. फिर जिस किसी को उसका कर्म-पत्र उसके दाहिने हाथ में दिया गया,
- 8. तो उससे आसान, सरसरी हिसाब लिया जाएगा
- 9. और वह अपने लोगों की ओर ख़ुश-ख़ुश पलटेगा