अल-नबा - क़ुरान - हारुन याह्या
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1. किस चीज़ के विषय में वे आपस में पूछ-गच्छ कर रहे है?
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2. उस बड़ी ख़बर के सम्बन्ध में,
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3. जिसमें वे मतभेद रखते है
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4. कदापि नहीं, शीघ्र ही वे जान लेंगे।
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5. फिर कदापि नहीं, शीघ्र ही वे जान लेंगे।
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6. क्या ऐसा नहीं है कि हमने धरती को बिछौना बनाया
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7. और पहाड़ों को मेख़े?
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8. और हमने तुम्हें जोड़-जोड़े पैदा किया,
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9. और तुम्हारी नींद को थकन दूर करनेवाली बनाया,
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10. रात को आवरण बनाया,
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11. और दिन को जीवन-वृति के लिए बनाया
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12. और तुम्हारे ऊपर सात सुदृढ़ आकाश निर्मित किए,
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13. और एक तप्त और प्रकाशमान प्रदीप बनाया,
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14. और बरस पड़नेवाली घटाओं से हमने मूसलाधार पानी उतारा,
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15. ताकि हम उसके द्वारा अनाज और वनस्पति उत्पादित करें
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16. और सघन बांग़ भी।
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17. निस्संदेह फ़ैसले का दिन एक नियत समय है,
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18. जिस दिन नरसिंघा में फूँक मारी जाएगी, तो तुम गिरोह को गिरोह चले आओगे।
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19. और आकाश खोल दिया जाएगा तो द्वार ही द्वार हो जाएँगे;
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20. और पहाड़ चलाए जाएँगे, तो वे बिल्कुल मरीचिका होकर रह जाएँगे
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21. वास्तव में जहन्नम एक घात-स्थल है;
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22. सरकशों का ठिकाना है
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23. वस्तुस्थिति यह है कि वे उसमें मुद्दत पर मुद्दत बिताते रहेंगे
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24. वे उसमे न किसी शीतलता का मज़ा चखेगे और न किसी पेय का,
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25. सिवाय खौलते पानी और बहती पीप-रक्त के
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26. यह बदले के रूप में उनके कर्मों के ठीक अनुकूल होगा
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27. वास्तव में किसी हिसाब की आशा न रखते थे,
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28. और उन्होंने हमारी आयतों को ख़ूब झुठलाया,
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29. और हमने हर चीज़ लिखकर गिन रखी है
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30. "अब चखो मज़ा कि यातना के अतिरिक्त हम तुम्हारे लिए किसी और चीज़ में बढ़ोत्तरी नहीं करेंगे। "
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31. निस्सदेह डर रखनेवालों के लिए एक बड़ी सफलता है,
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32. बाग़ है और अंगूर,
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33. और नवयौवना समान उम्रवाली,
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34. और छलक़ता जाम
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35. वे उसमें न तो कोई व्यर्थ बात सुनेंगे और न कोई झुठलाने की बात
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36. यह तुम्हारे रब की ओर से बदला होगा, हिसाब के अनुसार प्रदत्त
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37. वह आकाशों और धरती का और जो कुछ उनके बीच है सबका रब है, अत्यन्त कृपाशील है, उसके सामने बात करना उनके बस में नहीं होगा
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38. जिस दिन रूह और फ़रिश्ते पक्तिबद्ध खड़े होंगे, वे बोलेंगे नहीं, सिवाय उस व्यक्ति के जिसे रहमान अनुमति दे और जो ठीक बात कहे
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39. वह दिन सत्य है। अब जो कोई चाहे अपने रब की ओर रुज करे
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40. हमने तुम्हें निकट आ लगी यातना से सावधान कर दिया है। जिस दिन मनुष्य देख लेगा जो कुछ उसके हाथों ने आगे भेजा, और इनकार करनेवाला कहेगा, "ऐ काश! कि मैं मिट्टी होता!"
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अल फातेहा
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