अल-कमर - क़ुरान - हारुन याह्या
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1. वह घड़ी निकट और लगी और चाँद फट गया;
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2. किन्तु हाल यह है कि यदि वे कोई निशानी देख भी लें तो टाल जाएँगे और कहेंगे, "यह तो जादू है, पहले से चला आ रहा है!"
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3. उन्होंने झुठलाया और अपनी इच्छाओं का अनुसरण किया; किन्तु हर मामले के लिए एक नियत अवधि है।
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4. उनके पास अतीत को ऐसी खबरें आ चुकी है, जिनमें ताड़ना अर्थात पूर्णतः तत्वदर्शीता है।
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5. किन्तु चेतावनियाँ उनके कुछ काम नहीं आ रही है! -
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6. अतः उनसे रुख़ फेर लो - जिस दिन पुकारनेवाला एक अत्यन्त अप्रिय चीज़ की ओर पुकारेगा;
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7. वे अपनी झुकी हुई निगाहों के साथ अपनी क्रबों से निकल रहे होंगे, मानो वे बिखरी हुई टिड्डियाँ है;
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8. दौड़ पड़ने को पुकारनेवाले की ओर। इनकार करनेवाले कहेंगे, "यह तो एक कठिन दिन है!"
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9. उनसे पहले नूह की क़ौम ने भी झुठलाया। उन्होंने हमारे बन्दे को झूठा ठहराया और कहा, "यह तो दीवाना है!" और वह बुरी तरह झिड़का गया
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10. अन्त में उसने अपने रब को पुकारा कि "मैं दबा हुआ हूँ। अब तू बदला ले।"
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11. तब हमने मूसलाधार बरसते हुए पानी से आकाश के द्वार खोल दिए;
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12. और धरती को प्रवाहित स्रोतों में परिवर्तित कर दिया, और सारा पानी उस काम के लिए मिल गया जो नियत हो चुका था
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13. और हमने उसे एक तख़्तों और कीलोंवाली (नौका) पर सवार किया,
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14. जो हमारी निगाहों के सामने चल रही थी - यह बदला था उस व्यक्ति के लिए जिसकी क़द्र नहीं की गई।
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15. हमने उसे एक निशानी बनाकर छोड़ दिया; फिर क्या कोई नसीहत हासिल करनेवाला?
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16. फिर कैसी रही मेरी यातना और मेरे डरावे?
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17. और हमने क़ुरआन को नसीहत के लिए अनुकूल और सहज बना दिया है। फिर क्या है कोई नसीहत करनेवाला?
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18. आद ने भी झुठलाया, फिर कैसी रही मेरी यातना और मेरा डराना?
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19. निश्चय ही हमने एक निरन्तर अशुभ दिन में तेज़ प्रचंड ठंडी हवा भेजी, उसे उनपर मुसल्लत कर दिया, तो वह लोगों को उखाड़ फेंक रही थी
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20. मानो वे उखड़े खजूर के तने हो
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21. फिर कैसी रही मेरी यातना और मेरे डरावे?
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22. और हमने क़ुरआन को नसीहत के लिए अनुकूल और सहज बना दिया है। फिर क्या है कोई नसीहत हासिल करनेवाला?
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23. समूद ने चेतावनियों को झुठलाया;
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24. और कहने लगे, "एक अकेला आदमी, जो हम ही में से है, क्या हम उसके पीछे चलेंगे? तब तो वास्तव में हम गुमराही और दीवानापन में पड़ गए!
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25. "क्या हमारे बीच उसी पर अनुस्मृति उतारी है? नहीं, बल्कि वह तो परले दरजे का झूठा, बड़ा आत्मश्लाघी है।"
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26. "कल को ही वे जान लेंगे कि कौन परले दरजे का झूठा, बड़ा आत्मश्लाघी है।
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27. हम ऊँटनी को उनके लिए परीक्षा के रूप में भेज रहे है। अतः तुम उन्हें देखते जाओ और धैर्य से काम लो
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28. "और उन्हें सूचित कर दो कि पानी उनके बीच बाँट दिया गया है। हर एक पीने की बारी पर बारीवाला उपस्थित होगा।"
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29. अन्ततः उन्होंने अपने साथी को पुकारा, तो उसने ज़िम्मा लिया फिर उसने उसकी कूचें काट दी
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30. फिर कैसी रही मेरी यातना और मेरे डरावे?
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31. हमने उनपर एक धमाका छोड़ा, फिर वे बाड़ लगानेवाले की रौंदी हुई बाड़ की तरह चूरा होकर रह गए
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32. हमने क़ुरआन को नसीहत के लिए अनुकूल और सहज बना दिया है। फिर क्या कोई नसीहत हासिल करनेवाला?
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33. लूत की क़ौम ने भी चेतावनियों को झुठलाया
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34. हमने लूत के घरवालों के सिवा उनपर पथराव करनेवाली तेज़ वायु भेजी।
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35. हमने अपनी विशेष अनुकम्पा से प्रातःकाल उन्हें बचा लिया। हम इसी तरह उस व्यक्ति को बदला देते है जो कृतज्ञता दिखाए
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36. उसने जो उन्हें हमारी पकड़ से सावधान कर दिया था। किन्तु वे चेतावनियों के विषय में संदेह करते रहे
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37. उन्होंने उसे फुसलाकर उसके पास से उसके अतिथियों को बलाना चाहा। अन्ततः हमने उसकी आँखें मेट दीं, "लो, अब चखो मज़ा मेरी यातना और चेतावनियों का!"
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38. सुबह सवेरे ही एक अटल यातना उनपर आ पहुँची,
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39. "लो, अब चखो मज़ा मेरी यातना और चेतावनियों का!"
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40. और हमने क़ुरआन को नसीहत के लिए अनुकूल और सहज बना दिया है। फिर क्या है कोई नसीहत हासिल करनेवाला?
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41. और फ़िरऔनियों के पास चेतावनियाँ आई;
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42. उन्होंने हमारी सारी निशानियों को झुठला दिया। अन्ततः हमने उन्हें पकड़ लिया, जिस प्रकार एक ज़बरदस्त प्रभुत्वशाली पकड़ता है
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43. क्या तुम्हारे काफ़िर कुछ उन लोगो से अच्छे है या किताबों में तुम्हारे लिए कोई छुटकारा लिखा हुआ है?
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44. या वे कहते है, "और हम मुक़ाबले की शक्ति रखनेवाले एक जत्था है?"
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45. शीघ्र ही वह जत्था पराजित होकर रहेगा और वे पीठ दिखा जाएँगे
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46. नहीं, बल्कि वह घड़ी है, जिसका समय उनके लिए नियत है और वह बड़ी आपदावाली और कटु घड़ी है!
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47. निस्संदेह, अपराधी लोग गुमराही और दीवानेपन में पड़े हुए है
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48. जिस दिन वे अपने मुँह के बल आग में घसीटे जाएँगे, "चखो मज़ा आग की लपट का!"
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49. निश्चय ही हमने हर चीज़ एक अंदाज़े के साथ पैदा की है
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50. और हमारा आदेश (और काम) तो बस एक दम की बात होती है जैसे आँख का झपकना
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51. और हम तुम्हारे जैसे लोगों को विनष्ट कर चुके है। फिर क्या है कोई नसीहत हासिल करनेवाला?
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52. जो कुछ उन्होंने किया है, वह पन्नों में अंकित है
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53. और हर छोटी और बड़ी चीज़ लिखित है
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54. निश्चय ही डर रखनेवाले बाग़ो और नहरों के बीच होंगे,
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55. प्रतिष्ठित स्थान पर, प्रभुत्वशाली सम्राट के निकट
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